dukha ko pida

Shreeya Waiba

khai molai afnai jiban sathile bujdaina kina mo afai sochna sakirako xaina jibanma therai dukha Huda rahexa bidesh janxu kamauxu banera tra mero Sapna Pura bayana

#अन्य


Maya pokhna sakina

Jivan Timilsena

1.Maile pokhna sakena aafno maya temile bujeuna pani
Runaa tw mho ruuye khusi hoki dukha ko aasu sakinau bujna pani 7

#माया / प्रेम


jhuto maya

Nten Solta

maya garnu thiyo vane jhuto kasam khayeu kina. maya hi garnu thiyena vane mero aghi aayeu ki

#अन्य



Amit Kumar

mero gajal pani aayo hae sabae lea hernu hola hae la

#


गजल

Siddha Raj Pandey

फकाउनको लागि त्यो भन्दा अरू कुनै बहाना छैन
आफूलाई मात्रै चलाख नठान हेर लाटो जमाना छैन ।।

जीवनलाई अखण्ड कथामा परिणत गर्न सकिन्छ तर
जिन्दगीको किताब खोज्दै जाऊ त्यसमा पाना छैन ।।

अरे भन्न त भन्थी उसले आफूलाई बिर्सेर माया गर्छु
तर उसको मन मुटु भित्र मेरो मायाको खजाना छैन ।।

अब म मेरी प्रियालाई बेहुली सिँगारे जस्तै सिँगार्ने छु
आजसम्म पनि सिउँदोमा सिन्दुर कानमा झुम्काना छैन ।।

कसरी जिन्दगी भर साथ दिन्छु भनौँ मेरी प्यारी तिमीलाई
यहाँ आफ्नै आयुको जीवन्त रहने कुनै पनि ठेगाना छैन ।।
✍️ सिद्धराज पाण्डेय
अछाम

#अन्य


रचना

Pankaj Kumar Yadav

#रचना#
✍️पँकज कुमार यादव

लैला कऽ दिल लऽकऽ मजनु कोना भाईग गेलै!
सुतल रहै समाज आब समुच्चा जाईग गेलै!!

बेर बेर पुछैत छलै ओकरे सँग हम बिबाह करब!
हुन्कर पापा तामस सऽ कहै हम जहर खाकऽ मरब!!

जखन उईर गेलीह ओ दुनुटा बैन कऽ मजनु /लैला!
आब परिबार दुआ करैत अछी सलामत रहे हमर छैला!!

लैला कऽ बाबू जी दरखास पेस कैल्कै जा कऽ थानामे!
आब हुन्कर दुनुक जोरी अमर रहतै ईतिहासके पानामे!!

घर सँ बाहर बहुत दुर ओ दुनु बहुत खुसी सँ रहैत हेतै!
सबटा दु:ख सुख एक दोसर सँगे बाईट ओ सहैत हेतै!!

हुन्का सभक चिन्ता जुनि करियौ यहाँ सब परिबार!
ओ सब मिटएबा मे लागल छै समाजक अत्याचार!!

अपना सभक समाजमे दहेज दऽकऽ बिबाह करैत छैक!
किछु दहेजक कमी कऽ कारने सँ बेटीक चाँप परैत छैक!!

आगि दहेजक देखियौ अपना समाजमे कोना पजैर रहल छै!
आ एहि आगिमे सबठाँ सबहक बेटी तरैप कऽ जरि रहल छै!!

बेटी होईत अछि जगके तारा और नीर गगनमे चमकैत अछी!
जाही परिबारमे बेटी अछी वो  फुल स बेसी गमकैत अछि!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
दहेज लऽ भेलै बिबाह ओ बेटी आईगमे जैर गेलै!
हम प्रेम बिबाह केलौ कि समाजक ईजत सैर गेलै!!
आनहर हब अपन समाज अपन केकरो काबुमे नै!
फुटल डोल बनि पिट कहैअ फल्नाके बेटी उर हैर गेलै!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
कहादुन ओ दुनु भाईग गेलैअ!
नै जानि ओ सब कोन सपना साईज गेलैअ!!
उमेर सँ  छलै ओ मात्र चौदऽ बरख के !
कोना ओकरा जबानीमे आईग लाईग गेलैअ!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
ई हाबाबिहाईर कि करतै से कोई नै जानै छै!
देख करतुत हिन्क लोक सब बहुत कानै छै!!
बेर-बेर आईब लोकक त्रास बढा दैत छैक ई!
लोक करै लाख गोहरिया तैयो ई नै मानै छै!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
जहिया सँ हमरा जिन्दगीमे वो आयल छै!
ओकरे दर्द सँ भरल दिल हमर घायल छै!!
अबै नै चैन हमरा दिन और नै राईत्मे!
रोज सपनामे खनकाबै वो पाअल छै!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
भागिक ओ बंस मे दाग लगा देलकै!
बाबू माईके बहुत बढका सजा देलकै!!
भा ग' सऽ पहिने सभ अपन लगैत छलै!
आब ओ त रिस्तेदारो केर दुर भगा देलकै!!

#कता
✍️पँकज_कुमार_यदब
हमरा  सँग  दिल  अहाँ  लगाउन!
धङकनके आबाज अपन सुनाउन!!
प्रेमी छी अही केर हम  प्रिय् !
बनि दुल्हिन हमरा घरमे आउन!!

#कता
✍️पँकज_कुमार_यदब
बात नै क र चाहै छै ओकरा बोर लगै छै!
आन भेलै अपन आ जन्मदाता चोर लगै छै!!
अपने भुखले रैह क ओकर भुख मेटेलकै!
ओ माई बाप आई ओकरा कठोर लगै छै!!

#कता
✍️पँकज_कुमार_यदब
रिमझिम बरसैअ पानी बहुत याद अबैअ!
नित दिन भिजैअ ओहो से समाद अबैअ!!
भिजल पानीमे  मोन सँ धान रोपैत हेतै!
ओहो, राति सपनामे ओकर आवाज अबैए!!

#कता
✍️पँकज_कुमार_यदब
हे प्रभु ई तो कि केलहो!
सबके केहन सजाय देलहो!!
सब मरैछै बाढिक पलार सँ सगरो!
कोना क एहन कठोर भेलहो!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
दहेज लेनाई भिख भऽ गेलै!
भाईग गेलै से निक भऽ गेलै!!
एकदोसर सँ बहुत प्रेम करै छलै!
समाजमे ई बात लिक भऽ गेलै!!

#अन्य


रचना

Pankaj Kumar Yadav

#रचना#
✍️पँकज कुमार यादव

लैला कऽ दिल लऽकऽ मजनु कोना भाईग गेलै!
सुतल रहै समाज आब समुच्चा जाईग गेलै!!

बेर बेर पुछैत छलै ओकरे सँग हम बिबाह करब!
हुन्कर पापा तामस सऽ कहै हम जहर खाकऽ मरब!!

जखन उईर गेलीह ओ दुनुटा बैन कऽ मजनु /लैला!
आब परिबार दुआ करैत अछी सलामत रहे हमर छैला!!

लैला कऽ बाबू जी दरखास पेस कैल्कै जा कऽ थानामे!
आब हुन्कर दुनुक जोरी अमर रहतै ईतिहासके पानामे!!

घर सँ बाहर बहुत दुर ओ दुनु बहुत खुसी सँ रहैत हेतै!
सबटा दु:ख सुख एक दोसर सँगे बाईट ओ सहैत हेतै!!

हुन्का सभक चिन्ता जुनि करियौ यहाँ सब परिबार!
ओ सब मिटएबा मे लागल छै समाजक अत्याचार!!

अपना सभक समाजमे दहेज दऽकऽ बिबाह करैत छैक!
किछु दहेजक कमी कऽ कारने सँ बेटीक चाँप परैत छैक!!

आगि दहेजक देखियौ अपना समाजमे कोना पजैर रहल छै!
आ एहि आगिमे सबठाँ सबहक बेटी तरैप कऽ जरि रहल छै!!

बेटी होईत अछि जगके तारा और नीर गगनमे चमकैत अछी!
जाही परिबारमे बेटी अछी वो  फुल स बेसी गमकैत अछि!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
दहेज लऽ भेलै बिबाह ओ बेटी आईगमे जैर गेलै!
हम प्रेम बिबाह केलौ कि समाजक ईजत सैर गेलै!!
आनहर हब अपन समाज अपन केकरो काबुमे नै!
फुटल डोल बनि पिट कहैअ फल्नाके बेटी उर हैर गेलै!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
कहादुन ओ दुनु भाईग गेलैअ!
नै जानि ओ सब कोन सपना साईज गेलैअ!!
उमेर सँ  छलै ओ मात्र चौदऽ बरख के !
कोना ओकरा जबानीमे आईग लाईग गेलैअ!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
ई हाबाबिहाईर कि करतै से कोई नै जानै छै!
देख करतुत हिन्क लोक सब बहुत कानै छै!!
बेर-बेर आईब लोकक त्रास बढा दैत छैक ई!
लोक करै लाख गोहरिया तैयो ई नै मानै छै!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
जहिया सँ हमरा जिन्दगीमे वो आयल छै!
ओकरे दर्द सँ भरल दिल हमर घायल छै!!
अबै नै चैन हमरा दिन और नै राईत्मे!
रोज सपनामे खनकाबै वो पाअल छै!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
भागिक ओ बंस मे दाग लगा देलकै!
बाबू माईके बहुत बढका सजा देलकै!!
भा ग' सऽ पहिने सभ अपन लगैत छलै!
आब ओ त रिस्तेदारो केर दुर भगा देलकै!!

#कता
✍️पँकज_कुमार_यदब
हमरा  सँग  दिल  अहाँ  लगाउन!
धङकनके आबाज अपन सुनाउन!!
प्रेमी छी अही केर हम  प्रिय् !
बनि दुल्हिन हमरा घरमे आउन!!

#कता
✍️पँकज_कुमार_यदब
बात नै क र चाहै छै ओकरा बोर लगै छै!
आन भेलै अपन आ जन्मदाता चोर लगै छै!!
अपने भुखले रैह क ओकर भुख मेटेलकै!
ओ माई बाप आई ओकरा कठोर लगै छै!!

#कता
✍️पँकज_कुमार_यदब
रिमझिम बरसैअ पानी बहुत याद अबैअ!
नित दिन भिजैअ ओहो से समाद अबैअ!!
भिजल पानीमे  मोन सँ धान रोपैत हेतै!
ओहो, राति सपनामे ओकर आवाज अबैए!!

#कता
✍️पँकज_कुमार_यदब
हे प्रभु ई तो कि केलहो!
सबके केहन सजाय देलहो!!
सब मरैछै बाढिक पलार सँ सगरो!
कोना क एहन कठोर भेलहो!!

#कता
✍️पँकज कुमार यादव
दहेज लेनाई भिख भऽ गेलै!
भाईग गेलै से निक भऽ गेलै!!
एकदोसर सँ बहुत प्रेम करै छलै!
समाजमे ई बात लिक भऽ गेलै!!

#अन्य


गरिब नेपाल

Pankaj Kumar Yadav

।।गजल।।
पँकज_कुमार_यादब
शहिदनगर नगरपालिका-९(गोठकोयल्पुर).

१.अपने देशमे गरीब भुख सँ मरि रहल्छै!
बेरोजगार युवा मरूभुमीमे जरि रहल्छै!!

देशक नियम कानुन केहन छै से कि कहु!
बलत्कार भेल एक्गो बेटिक लास सैँर रहल्छै!!

देश स्वतन्त्र भगेल से हल्ला मात्रे सुनैत छी!
एहिठाम नेताक आँखिमे जन्ता गरि रहल्छै!!

कतेक जन्ता आन्दोलन कयलक सडक पर
मुदा अपने सरकार जन्ताक घररि रहल्छै!!l

केकरा उपर बिशवास करू भोट लेलक चुनिक!
सभ भोट जम्मा कऽ अपने घर भरि रहल्छै!!

२.कोरोना मे शहर सँ गेलै गाम जानू!
ओकरा बिनु सुनसान अहि ठाम जानू!!

याद ओ पल के अबैत हेतै ओकरा!
जपैत हेतै सदिखन हमर नाम जानू!!

कोना रहैत हेतै असगर हमरा विनु!
पिबैत हेतै हमर याद मे जाम जानू!!

छौरा अगती सभ लाईग परल हेतै!
भगबैत हेतै ओकरा दाहिन-बाम जानू!!

एतै कहिया हमर ईन्तजारमे ओत!
खाइत हेतै शुवह शाम बदाम जानू!!

३.हम जोगी भऽ गेली अहीँक कारण सँ!
हम रोगी भऽ गेली अहीँक कारण सँ!!

अहीँक प्रेममे डुबल रहि राईत दिन!
हम भोगी भऽ गेली अहीँक कारण सँ!!

अहीँक खुसीक लेल बेच देलि यै खेत!
हम योगी भऽ गेली अहीँक कारण सँ!!

मधुर होट्क लल्का जे लाली रहे !
हम लोभी भऽ गेली अहीँक कारण सँ!!

लेकिन खुसी लगैय एगो बात के !
हम सहयोगी भऽ गेली अहीँक कारण स!!

४.धुम धाम सँ बाजा बजाक आईब प्रीया,
बरियाती सङ्ग नटुवा नचाक आईब प्रीया,

गरिब छी तै बात के कोनो चिन्ता नै करु,
सौसे देह  गहना लगाक आईब प्रीया,

कनि और ईन्तजार करु हमर प्रीया,
सुहार राईत के घर सजाक आईब प्रीया,

आब हमरा सँ कोनो गल्ती नै हेत प्रीया,
कैल्हा गल्ती सब के बिसराक आईब प्रीया,

अदि एते कहलो पर बात नै मानव प्रीया,
त जबर जस्ती भगाक  ल जाईब प्रीया!

५.अहीँके पएबाक आसमे!
मन उडै छल हमर आकासमे!!

समयक हावा एहन चललै !
हेरागेल नेह हमर बतासमे!!

घुरि नहि एलौं एखन्धरि!
हम खोजैछी एखनो अपन सासमे!!

अहीँक प्रेममे मन हराएल अछि!
शरीर बदलि गेल अछि लासमे!!

जऽ याद आएब हम कहियो अहाँके!
हमरा खोजिलेब एहि खुल्ला आकासमे!!

#बिछोड



"जीवन संगिनी"

Prem Singdan Tamang

आँखा भरी उनको तस्बिर,राखेको छु लुकाएर ।
नदी बगोस् आँखाबाट,लाने छैन बगाएर ।

मेरो मनको गुम्बा भित्र,राखेको छु सजाएर।
घाम-पानी,आँध-हुरी,धुलोसँग जोगाएर ।

मेरो हरेक यात्रा हरूमा,पाइला-पाइला साथ दिने।
यिनी परिन् मेरी प्रिया,लड्न खोज्दा हात दिने ।

#माया / प्रेम


जिक्र किसका (शायरी)

Dixit Shakun

तुम्हारी महफिल में इक और नाम किसका है
हर सूरत है यहाँ पहचानी सी नाम किस का है

#धोका


जीवनको यात्रा

Bibek Sah

जीवनमा यदि माया नै माया भइदिएको भए,
त्यो विछोडको पीडालाई कस्ले बुझ् थ्यो होला।

जीवनमा यदि खुशी नै खुशी भइदिएको भए,
त्यो आँशुको मोल कस्ले बुझ् थ्यो होला ।

जीवनमा यदि सुख नै सुख भइदिएको भए,
त्यो दुःखको बिपतिलाई को बुझ् थ्यो होला।

यदि जीवनमा सूर्यको तापमात्र भइदिएको भए,
त्यो सितल हावामा को रमाउँन थ्यो होला।

मानिसको जीवन घामछायाको यात्रा हो,
कहिले दुःख कहिले सुख आउँदै रहन्छन्।

लेखक: विबेक साह
ठेगाना:जनकपुरधाम,पुलचोक

#अन्य


जनताको कुरा बुझ्ने सरकार कता छ

Bibek Sah

जनताको कुरा बुझ्ने सरकार कता छ,
सबै कुरा मिलाईदिने सरकार कता छ।

हुन्छ एकपछि अर्को बलत्कार त्यो सम्झने सरकार कता छ,
बढ्दै छ यहाँ दिनहुँ भर्ष्टचार त्यो हेर्ने सरकार कता छ।

बसेका छन् हातमाथि हात राखेर कानुन प्रशासन ,त्यो हेर्ने सरकार कता छ।
हाकिमको कलम चल्दैन रे खल्तीमा पैसा नदिए, त्यो हेर्ने सरकार कता छ।

जनता कर बुझाउन का लागि दिनभरि पैसा कमाउँछ,
नेता खल्तीमा पैसा राख्नको लागि दिनभरि खुर्सिमा बस्छन्, त्यो हेर्ने सरकार कता छ।

लेखक: बिवेक साह
ठेगाना:जनकपुरधाम, पुलचोक

#अन्य